थायराइड को कंट्रोल करने के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय

आज के समय में थायराइड एक आम समस्या बन गई है। थायराइड असंतुलित हार्मोन, अस्वस्थ खानपान, तनाव और आयोडिन की कमी के कारण भी होती हैं। पुरुषों से ज्यादा यह समस्या महिलाओं में अधिक देखने को मिलती है। थायराइड दो तरह का होता है हाइपोथायरायिज्म और हाइपरथायरायडिज्म। थायराइड ग्लैंड हमारी गर्दन के पिछले हिस्से में होती है और यह हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करता है। लेकिन कई बार यह प्रोसेस धीमा हो जाता है और थायराइड की समस्या हो जाती है। थायराइड होने पर वजन तेजी से बढ़ने लगता है, बाल झड़ते है, कमजोरी का अनुभव होता, बहुत पसीना आता है, पीरियड्स में अनियमितता और हार्ट बीट तेज होना थायराइड के लक्षण हैं। अक्सर थायराइड होने पर लोग इसको कंट्रोल करने के लिए दवाइयों का सेवन शुरू कर देते हैं। लेकिन आपको बता दें, दवाइयों के सेवन के साथ इसे घरेलू उपायों से भी कंट्रोल किया जा सकता हैं।  घरेलू उपायों के बारे में जानने के लिए हमने बात की शारदा क्लीनिक के फिजिशियन डॉक्टर केपी सरदाना से।

नारियल तेल

नारियल तेल थायरॉयड ग्रंथि के बेहतर कामकाज करने में मदद करते हैं। नारियल का तेल, वजन कम करने में मदद करता है, चयापचय बढ़ाता है और शरीर के तापमान को संतुलित करता है। इसका सेवन करने के लिए खाने बनाने में इसका उपयोग करें। 

सेब का सिरका

सेब का सिरका हार्मोन के संतुलित उत्पादन करने में मदद करता है। इसके सेवन से शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज होता है, वजन कम होता है और शरीर से विषाक्त पदार्थ आसानी से बाहर निकलते हैं। इसके नियमित सेवन से पोषक तत्वों के अवशोषण में भी मदद मिलती है। इसका सेवन करने के लिए रोज सुबह इसे 1 गिलास पानी में 1 चम्मच सेब का सिरका और शहद को मिलाकर लें।

अदरक

अदरक के सेवन से थायराइड को कंट्रोल किया जा सकता है। अदरक में पोटेशियम और मैग्नीशियम पाए जाते हैं, जो शरीर की सूजन को कम करने के साथ इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं। अदरक का सेवन करने के लिए इसकी चाय या इसे खाने में डालकर खाया जा सकता है।

विटामिन बी

थायराइड की समस्या को दूर करने के लिए विटामिन बी का सेवन बहुत जरूरी होता है। विटामिन बी का सेवन करने के लिए डाइट में अंडे, मांस, मछली, फलियां, दूध और अखरोट को शामिल करें। विटामिन बी के सेवन से शरीर हेल्दी रहने के साथ कई बीमारियां भी दूर होती हैं।

विटामिन डी

विटामिन डी की कमी से थायराइड की समस्या हो सकती है। रोज दिन भर में कोशिश करें कि सुबह की 15 मिनट की धूप लें। ऐसा करने से कैल्शियम का अवशोषण भी बेहतर होगा और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अच्छी होगी। शरीर में विटामीन डी की कमी को पूरा करने के लिए संतरे का रस और अंडे की जर्दी का सेवन किया जा सकता हैं।

थायराइड को कंट्रोल करने के लिए इन घरेलू उपायों को किया जा सकता हैं। हालांकि, इन उपायों को करने से पहले डॉक्टर की राय अवश्य लें।

बार-बार बदलता मौसम बढ़ा सकता है स्वास्थ्य चुनौती, जानिए इनसे कैसे निपटना है



आज तेज धूप, कल बादल और उसके साथ ही बारिश, मौसम का यह पल-पल बदलाव किसी को भी बीमार कर सकता है। इसलिए जरूरी है कि आप भी इस दौरान होने वाली चुनौतियों और उसके समाधान के बारे में जानें।

मौसम, पर्यावरण और जीवन शैली में बदलाव के कारण ऋतुओं का परिवर्तन स्वास्थ्य चुनौतियों का कारण बन सकता है। मौसम बहुत ही अप्रत्याशित हैएक दिन इतनी धूप है कि आपको पसीना रहा है, अगले दिन ठंड है और दूसरे दिन बारिश हो रही है। मौसम के बदलते मिजाज और बदलते तापमान के कारण मौसम के पूर्वानुमान पर हमेशा भरोसा नहीं किया जा सकता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपकी इम्युनिटी कितनी मजबूत है। समय-समय पर मौसम आपको परेशान कर सकता है। इसलिए यह जरूरी है कि आप मौसम में बदलाव के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं और उनके समाधान के बारे में सब कुछ जानें।

बार-बार बदलते मौसम के कारण आपको करना पड़ सकता है इन चुनौतियाें का सामना

1. एलर्जी:

मौसमी एलर्जी मौसम के बदलाव के दौरान हो सकती है, खासकर सर्दी से वसंत या गर्मी के संक्रमण के दौरान। यह हवा में पराग और अन्य एलर्जी में वृद्धि के कारण हो सकती है।

2. रेस्पिरेटरी इंफेक्शन :

मौसम में बदलाव के साथ फ्लू, जुकाम और निमोनिया जैसे रेस्पिरेटरी इंफेक्शन में बढ़ोतरी हो सकती है. यह तापमान और आर्द्रता के स्तर में बदलाव के कारण होता है।

3. डिहाइड्रेशन :

गर्म महीनों के दौरान अधिक पसीना आने और शरीर से तरल पदार्थों की कमी के कारण डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक होता है। इससे थकान, सिरदर्द और चक्कर सकते हैं।

4. गर्मी से संबंधित बीमारियां :

गर्मी से संबंधित बीमारियां जैसे कि गर्मी के कारण थकावट और हीटस्ट्रोक गर्म महीनों के दौरान हो सकती हैं, खासकर जब बाहरी गतिविधियों में संलग्न हों या धूप में लंबे समय तक रहें।

5. सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर :

सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (SAD) एक तरह का डिप्रेशन है जो सर्दियों के महीनों में कम धूप होने पर हो सकता है। इससे मूड खराब, थकान और नींद के पैटर्न में बदलाव जैसे लक्षण हो सकते हैं।


यहां वे उपाय दिए गए हैं, जो आपको इन चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करेंगे

1. अपने शरीर पर ध्यान दें :

मौसम के बदलाव के दौरान अपने शरीर में होने वाले किसी भी बदलाव पर ध्यान दें, जैसे कि भूख में बदलाव, नींद के पैटर्न या ऊर्जा के स्तर में बदलाव। यह आपको किसी भी संभावित स्वास्थ्य समस्या की शुरुआत में ही पहचान करने में मदद कर सकता है।

 2. बढ़ाएं अपना इम्यून सिस्टम :

मौसम का बदलना कई बार आपके इम्यून सिस्टम को कमजोर कर सकता है. अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए, फलों, सब्जियों, साबुत अनाज, प्रोटीन से भरपूर स्वस्थ आहार लें और पर्याप्त नींद और आराम करें।

 3. हाइड्रेटेड रहें :

जैसे ही मौसम गर्म होता है, खूब पानी, नारियल पानी, नींबू पानी या हर्बल चाय पिएं। मीठे पेय और शराब से बचें, जो आपके शरीर को निर्जलित कर सकते हैं। डीहाइड्रेशन से थकान, चक्कर आना और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

4. अपना आहार समायोजित करें :

गर्मी के मौसम के दौरान, हल्का, ताजा और अधिक ठंडा खाद्य पदार्थ शामिल करने के लिए अपने आहार को समायोजित करना एक अच्छा विचार है। ऐसे फल और सब्जियां शामिल करें जिनमें पानी की मात्रा अधिक हो, जैसे तरबूज, खीरा, संतरा, अंगूर और जामुन। ये आपको हाइड्रेटेड रखने में मदद करेंगे और आवश्यक पोषक तत्व और विटामिन प्रदान करेंगे।

शरीर की गर्मी कम करने और पाचन में सहायता के लिए दही, पुदीना और दही जैसे ठंडे खाद्य पदार्थ खाएं। भारी, तैलीय और मसालेदार भोजन से बचें जो शरीर की गर्मी को बढ़ा सकते हैं और पाचन संबंधी समस्याओं को जन्म दे सकते हैं। मछली, टोफू, पनीर या चिकन जैसे हल्के प्रोटीन भी शामिल करें और लाल मांस का सेवन कम करें।

5. अपनी त्वचा को धूप से बचाएं :

गर्मी के महीनों में अपनी त्वचा को सूरज की हानिकारक यूवी किरणों से बचाना बेहद जरूरी है। सुरक्षात्मक कपड़े, एक टोपी और धूप का चश्मा पहनें, और एक उच्च एसपीएफ़ के साथ सनस्क्रीन का प्रयोग करें।

6. लू से बचाव के उपाय करें :

जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, लू लगने का खतरा बढ़ जाता है। दिन के सबसे गर्म समय में बाहरी गतिविधियों से बचें और वातानुकूलित स्थानों में रहें। यदि आपको बाहर होना ही है, तो हल्के, सांस लेने वाले कपड़े पहनें और छाया में बार-बार ब्रेक लें।

7. नियमित रूप से व्यायाम करें :

व्यायाम करने से आपका शरीर और दिमाग तरोताजा हो जाता है और आप सक्रिय रहते हैं। रोजाना करीब आधा घंटा एक्सरसाइज करने से आप फिट रहते हैं। यदि आप वायु प्रदूषण के कारण बाहर नहीं निकल सकते हैं, तो जिम या स्टूडियो में एक सत्र के लिए जाएं। लचीला और स्वस्थ रहने के लिए आप घर पर ही योगाभ्यास कर सकते हैं।

मौसम की परवाह किए बिना अपनी फिटनेस दिनचर्या को जारी रखने पर विचार करें। इस समय के दौरान आपके शरीर पर हमला करने वाले संक्रमणों से लड़ने के लिए एक फिट शरीर बेहतर ढंग से सुसज्जित होता है।

8. प्रोबायोटिक्स लें :

रोजाना प्रोबायोटिक्स लेने से आपकी प्रतिरोधक क्षमता में सुधार होता है और आपके बीमार पड़ने की संभावना कम हो जाती है। दही, और छाछ प्रोबायोटिक्स का एक बड़ा स्रोत है जो एलर्जी और सर्दी से बचाता है। प्रोबायोटिक्स स्वस्थ बैक्टीरिया होते हैं जो आपके पेट को स्वस्थ रखते हैं और ऊर्जावान महसूस कराते हैं।

9. अच्छी स्वच्छता अपनाएं :

गर्मी के मौसम में संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। अपने हाथों को बार-बार धोएं, व्यक्तिगत वस्तुओं को साझा करने से बचें और कीटाणुओं के प्रसार को रोकने के लिए खाँसते या छींकते समय अपना मुँह और नाक ढक लें।

अंत में

गर्मी में स्वस्थ आहार में भरपूर मात्रा में पानी और तरल पदार्थ, फलों और सब्जियों में पानी की मात्रा, ठंडा करने वाले खाद्य पदार्थ, हल्के प्रोटीन और स्वस्थ स्नैक्स शामिल होने चाहिए। इन टिप्स को अपनाकर आप स्वस्थ रह सकते हैं और गर्मी के मौसम का आनंद उठा सकते हैं।

सर्दियों में सरल और आसान घरेलू नुस्खे जो बलगम वाली खांसी और सीने की जकड़न से दिलाए राहत

cold and cough
सर्दी के मौसम में जुकाम और खांसी की समस्या आम होती है। ठंड के मौसम में लोगों को सूखी खांसी के बजाय बलगम वाली खांसी की समस्या ज्यादा होती है। इस तरह की खांसी में व्यक्ति को खांसी तो आती ही है, साथ ही बलगम या म्यूकस भी आता है। बलगम वाली खांसी होने पर सीना भारी लगता है और छाती में जकड़न महसूस होती है। ये खांसी आपको सुबह के समय ज्यादा परेशान कर सकती है। आमतौर पर सीने में बलगम के ज्यादा जमा हो जाने के कारण ऐसी समस्या होती है। इसी के कारण नाक से पानी या म्यूकस भी निकलने लगता है। इन सामान्य समस्याओं में दवा का सेवन करने से बेहतर है कि आप कुछ घरेलू उपाय अपनाएं, जो प्राकृतिक होने के कारण नुकसानदायक भी नहीं हैं।

सीने को भाप से सेकें
सीने की जकड़न और खांसी की समस्या में गर्म भाप बहुत फायदेमंद होती है। इससे नाक का रास्ता खुल जाता है और सांस लेने में होने वाली परेशानी दूर हो जाती है। इसके लिए एक बड़े बर्तन में पानी को ढककर खूब गर्म कर लें, ताकि बर्तन में ढेर सारी भाप बन जाए। अब एक तौलिये को सिर के ऊपर डालकर खुद को ढकें और बर्तन का ढक्कन खोलकर पानी के भाप को सीने और नाक पर लें। अगर आपके घर में थोड़ा सा पिपरमिंट हो, या यूकेलिप्टस का तेल हो, तो उसे इस पानी में डालें। ये सादे पानी की अपेक्षा ज्यादा फायदेमंद होगा।

अदरक की चाय पिएं
खांसी-जुकाम की समस्या में अदरक की चाय एक बेहद आसान घरेलू नुस्खा है। पुराने समय में दादी-नानी इसी नुस्खे से सर्दी की इन आम समस्याओं को ठीक कर लेती थीं। अदरक में ढेर सारे एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। इसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण भी होते हैं। इसके अलावा अदरक में मौजूद खास एंटीऑक्सीडेंट 'जिंजेरॉल' शरीर की रोग प्रतिरोधक बढ़ाता है। खांसी-जुकाम की समस्या होने पर आप एक पैन में पानी गर्म करें और इसमें 1/4 चम्मच चाय पत्ती डालें और एक छोटा टुकड़ा अदरक कूटकर या काटकर डालें। इसे 5 मिनट तक पकाएं और फिर गर्मा-गर्म पिएं। आप चाहें तो इस चाय को बनाते समय 5-6 तुलसी की पत्तियां डाल सकते हैं और मिठास के लिए 1 चम्मच शहद मिला सकते हैं।

शहद का करें इस्तेमाल
सीनों से आधे घंटे पहले एक या डेढ़ चम्मच आर्गेनिक शहद खा लें। इससे भी आपके सीने में जमा कफ निकल जाएगी और खांसी की समस्या से जल्द ही राहत मिल जाएगी। शहद में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, इसलिए ये बैक्टीरिया को मारता है और शरीर को डिटॉक्स करता है। असली शहद खाने से आप सर्दी, जुकाम और खांसी की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।

पानी पीने में न चूकें
हमारे शरीर के लिए रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बहुत जरूरी है। कई बार पानी की कमी होने पर भी शरीर में कई तरह की बीमारियां हो जाती हैं। जुकाम या कफ की समस्या हो जाने पर आमतौर पर लोगों को प्यास कम लगती है या पानी पीने में अच्छा नहीं लगता है। मगर ऐसी स्थिति में आपको कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी रोजाना पीना बहुत जरूरी है। पानी पीने से शरीर के बैक्टीरिया और वायरस पेशाब के बाहर निकल जाते हैं। इसलिए बीमार होने पर आपको पानी जरूर पीते रहना चाहिए।

गुनगुने पानी से नहाएं
सीने में जमे कफ को बाहर निकालने के लिए गुनगुने पानी से नहाना भी एक अच्छा विकल्प है। मगर यदि आपको बुखार है, तो आपको नहाना नहीं चाहिए। इसके अलावा यह भी ध्यान रखें कि पानी गुनगुना हो, बहुत अधिक गर्म नहीं। नहाने के दौरान अपने सीने पर गुनगुना पानी डालें। इससे जमी हुई कफ हट जाएगी और आपका सीना खुल जाएगा। मगर यह ध्यान रखें कि तबीयत खराब होने की स्थिति में आपको बहुत ज्यादा देर तक नहीं नहाना चाहिए। इसलिए 5-7 मिनट में जल्दी से नहाकर बाहर आ जाएं।

खून की कमी से होने वाले लक्षण और दूर करने के घरेलू नुस्खे


आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में अपनी हेल्थ का ध्यान रखना कठिन हैं। अगर सही और संतुलित भोजन नही किया जाये तो शरीर को बीमारियां जकड़ लेती हैं। हमारे शरीर में दो तरह की रक्त कोशिकांए होती है,सफेद और लाल। ऐसे में जब लाल रक्त कोशिकांए कम होती है तब शरीर में खून की कमी हो जाती है। इसे RBC रेड ब्लड सेल्स भी कहा जाता है, जिससे एनीमिया हो जाता है। खून की कमी के लक्षण खून की कमी कोई आम रोग नहीं है। इस रोग में रोगी के शरीर में खून की कमी हो जाती है और इसकी वजह से दूसरे रोग भी पैदा हो जाते हैं। पोषक तत्वों की कमी ब्लीडिंग, एजिंग, फॉलिक एसिड की कमी, स्मोकिंग ज्यादा करने से, विटामिन बी-12 की कमी से, आयरन की कमी से,घाव का जल्दी न भरना, हीमोग्लोबिन कम होने के लक्षण, जल्दी थकान होना, घबराहट होना,चक्कर और उल्टी आना, पीरियड्स के दौरान अधिक दर्द होना, घाव का जल्दी न भरना, त्वचा का फीका, पीला दिखना, तलवे और हथेलियों का ठंडा पड़ना, शरीर में तापमान की कमी होना, सीने और सिर में दर्द होना, आंखों के नीचे काले घेरे होना, छाती में जलन होना यह सभी खून की कमी के लक्षण होते हैं। 

खून की कमी को दूर करने के घरेलु नुस्खे 

1. अनार (Pomegranate):  एक अनार हमें सौ बीमारियों से लड़ने की क्षमता देता है, जो आयरन और अन्य खनिज पदार्थों जैसे कैल्शियम और मैग्नीशियम से भरपूर होता है। इसमें विटामिन सी भी होता है जो शरीर को आयरन के अवशोषण में मदद करता है। खून का स्तर बढाने के लिए डाक्टर सबसे पहले अनार खाने के लिए कहते है। अनार शरीर में खून की कमी को बहुत ही जल्दी कम कर देता है। इसलिए इसके सेवन से रेड ब्लड सेल्स और हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है।
    • एक कप अनार के जूस में दो चम्मच शहद और एक चौथाई चम्मच दालचीनी का पाउडर मिलाएं। इसे रोज अपने नाश्ते के साथ सेवन करें।
    • आप रोज सुबह एक मध्यम आकार के अनार का सेवन भी कर सकते हैं।
 2. टमाटर (Tomoto):  टमाटर को हम रोज खाते है, लेकिन आप में से बहुत कम लोग इसके फायदे के बारे में जानते है। हर दिन दो टमाटर काटकर उन पर काली मिर्ची और सेंधा नमक छिड़क कर खाने से खून तेजी से बनता है। 
3. चुकंदर (Beetroot):  आयरन की कमी के कारण होने वाले एनीमिया में चुकंदर अत्यधिक फायदेमंद होता है। इसमें आयरन, फाइबर, कैल्शियम, पोटैशियम, सल्फर और विटामिन भरपूर मात्रा में होते हैं। ये शरीर में खून की मात्रा बढ़ाने का रामबाण इलाज है। इसके साथ ही यह शरीर को पोषण प्रदान करता है, उसे साफ़ रखता है और अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन पहुँचाने में मदद करता है। इसके फलस्वरूप शरीर में रेड ब्लड सेल्स बढ़ने लगते हैं।
  • एक मध्यम आकार के चुकंदर को तीन गाजर और आधे शकरकंद के साथ काट लें। अब इन्हें जूसर में डालकर जूस तैयार करें। इस जूस का सेवन रोज एक बार करें।
  • आप चुकंदर को सब्जी या सलाद के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अधिक फायदा लेने के चुकंदर को छिलके के साथ सेवन करें
4. खजूर (Dates): खजूर में आयरन और विटामिन सी भरपूर रूप में पाया जाता है। विटामिन सी शरीर में आयरन के अवशोषण में मदद करता है।
    • रात को एक कप दूध में दो खजूर डुबोकर रख दें। सुबह खाली पेट इन खजूरों को खा लें और दूध को पी लें।
    • इसके आलावा आप सुबह खाली पेट सूखे खजूरों का सेवन भी कर सकते हैं।
5.सोयाबीन (Soybean):  सोयाबीन में भरपूर रूप से आयरन और विटामिन की मात्रा होती हैं, सोयाबीन का आटा लेकर थोड़ा गेहूं के आटे के साथ मिलाकर रोटी बना कर इसका सेवन कर सकते हैं या फिर इसकी सब्जी बनाकर भी इसका सेवन कर सकते हैं।

लगाएं दूध और शहद का मास्‍क त्‍वचा में तुरंत निखार पाए



दूध में शहद मिलाकर पीना हमारी सेहत के लिए बेहद ही फायदेमंद होता है। यह बात तो लगभग हम सभी जानते हैं, लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि शहद और दूध आपकी त्‍वचा की समस्‍याओं के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है। दूध एक बेहतरीन क्लींजर है जिससे हम त्वचा को साफ कर सकते है। दूध विटामिन ए, डी, बी-6, बी-12, कैल्शियम, प्रोटीन जैसे विटामिन और पोषक तत्वों से युक्त है। ये मिनरल्स त्वचा के टिश्‍यु में सुधार लाते है जिससे कोलेजन की मात्रा बढ़ जाती है और त्वचा को नमी मिलती है। साथ ही शहद, चेहरे के लिए सबसे अच्‍छा प्रोडक्‍ट है। इसे लगाने से चेहरे पर प्राकृतिक निखार आता है और त्‍वचा का रूखापन दूर होता है। अगर आपकी त्‍वचा बहुत ही सेंसटिव है तो शहद बहुत ही मददगार हो सकता है।



त्‍वचा के लिए दूध और शहद का मास्‍क ही क्‍यों?

सोचो अगर दूध और शहद को मिला दिया जाये तो शहद और दूध में मौजूद तत्‍व त्‍वचा की रंगत को निखारने के साथ उसे चमकदार और स्‍वस्‍थ बनाने में भी मदद करती है। चेहरे पर दूध और शहद से बने मास्‍क के इतने सारे फायदे हो सकते हैं, जिनके बारे में आप अंदाजा भी नहीं लगा सकतीं। शहद, चेहरे के लिए सबसे अच्‍छा प्रोडक्‍ट होता है। इसे लगाने से चेहरे पर प्राकृतिक निखार आता है और त्‍वचा का रूखापन भी चला जाता है। आइए जानें दूध और शहद का मास्‍क त्‍वचा के लिए कैसे फायदेमंद होता है।

बेहतर क्लीन्जर
कच्चा दूध का एक उत्कृष्ट क्‍लीन्‍जर है। यह बात तो हम सभी जानते हैं, लेकिन कच्‍चे दूध में शहद को मिक्‍स करने से यह जादुई सा असर करता है। इसके लिए कच्‍चे दूध में थोड़ा सा शहद मिलाकर कॉटन की मदद से चेहरे पर लगाकर पांच मिनट लगाने के बाद धो लें। नियमित रूप से ऐसा करने से आपकी त्‍वचा कोमल और साफ होने लगेगी।

त्‍वचा को चमकदार बनाएं
शहद और दूध में मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट शरीर के साथ त्‍वचा के लिए भी बेहद फायदेमंद होते हैं। शहद और दूध से बना मास्‍क त्‍वचा पर लगाने से तुरंत चमक आ जाती है। ऑफिस में पूरा दिन काम करने के बाद इसके इस्‍तेमाल से आप फ्रेश दिखने लगते है। साथ ही नियमित रूप से शहद और दूध के मास्‍क से चेहरे की टैनिंग भी दूर होने लगती है। विटामिन, मिनरल और प्रोटीन से भरपूर होने के कारण त्‍वचा की रंगत निखारने में भी मदद करता है।

दाग धब्‍बे मिटाएं
यह शहद और दूध के महत्वपूर्ण लाभ में से एक है। यह चेचक के निशान सहित कई प्रकार के निशान को हटाने के रूप में जाना जाता है। अगर आपके चेहरे पर मुंहासे या चेचक के दाग पडे़ हुए हैं तो, इस मास्‍क के नियमित रूप पर लगाने से गायब होने लगेंगे।

झुर्रियों को दूर करें
अगर आप अपने चेहरे से झुर्रियों को दूर करना चाहते हैं तो शहद और दूध से बना फेस पैक इस समस्‍या में आपकी मदद कर सकते है। इसके लिए दोनों को बराबर मात्रा में मिलाकर चेहरे पर लगा लें।

मुंहासों का इलाज करें
अगर आपको मुंहासों की समस्‍या है तो शहद और दूध से बने इस पेस्‍ट को जरूर इस्‍तेमाल करें। इस मास्‍क को नियमित रूप से लगाने से यह आपकी त्‍वचा के लिए चमत्‍कार के रूप में काम करता है और मुंहासों को इलाज करने में मदद करता है।

जानिए इलायची खाने के फायदे, क्यों है सेहतमंद



इलायची एक सुगंधित मसाला है। इसका इस्‍तेमाल खाने में स्वाद और खुशबू बढ़ाने के साथ-साथ माउथ फ्रेशनर के रुप में भी किया जाता है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि दिन में सिर्फ 1 इलायची खाने से आप कई तरह की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं से भी बच सकते हैं। य‍कीन नहीं आ रहा तो आइए इस आर्टिकल के माध्‍यम से दिन में 1 इलायची खाने के फायदों के बारे में जानें।

इलायची में आयरन, जिंक, राइबोफ्लेविन, सल्‍फर, विटामिन सी और नियासिन पाया जाता है। जो हर तरह से हमारे शरीर के लिए फायदेमंद होते है। साथ ही साथ यह कई सारी बीमारियों से हमारे शरीर को लड़ने में मदद करता है। वैसे तो इलायची खाने के फायदों की एक लंबी चौड़ी लिस्‍ट मौजूद है लेकिन आज हम आपको इसके कुछ खास फायदों के बारे में जानकारी देगें।



केवल '1 इलायची' खाने के फायदे
  • जिनकी सांसों से दुर्गंध आती है वह लोग रोजाना सिर्फ एक इलायची खाकर अपनी सांसों की दुर्गंध को दूर कर सकते हैं। क्‍योंकि इसमें बहुत सारे एंटी-बैक्‍टीरियल गुण होते हैं जो हमारे मुंह के अंदर मौजूद बैक्‍टीरिया को जड़ से खत्‍म कर देता है। इसलिए मुंह से आने वाली गंध, सांस की बदबू, मुंह के छाले, मसूडो मे दर्द या सूजन आदि मे बहुत अधिक लाभ देती है।
  • इलायची रेड ब्लड सेल्स के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह शरीर से विषैले तत्‍वों को बाहर कर फ्री रेडिकल्‍स का मुकाबला करती है।
  • यह हमारी पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। पाचन तंत्र में मौजूद किसी भी प्रकार की समस्‍या को खत्‍म करता है। इलायची प्राकृतिक रूप से गैस को खत्म करती है। यह पाचन को बढ़ाने, पेट की सूजन को कम करने व दिल की जलन को खत्म करने का काम करती है। अगर आपको पाचन तंत्र से जुड़ी कोई भी समस्‍या है तो रोजाना एक इलायची का सेवन करें।
  • सर्दी के मौसम में बहुत सारे लोगों को सर्दी जुकाम और गले में खराश की शिकायत रहती है। अगर आप रात को खाना खाने के बाद सिर्फ एक इलायची अच्‍छे से चबाकर खाते हैं और ऊपर से गुनगुना पानी पीते हैं तो निश्चित रूप से आपकी यह समस्‍या दूर हो जाती है। इस उपाय को करने के बाद आपको किसी भी एलोपैथी दवा लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
  • इलायची से कोलेस्‍ट्रॉल भी कम किया जा सकता है। अगर आप रोजाना ए‍क इलायची को अच्‍छे से चबा-चबाकर खाते हैं तो यह हृदय संबधी रोगो मे लाभ मिलता है। यह हमारे ब्‍लड सर्कुलेशन को नियंत्रित करता है जिससे शरीर की बीमारियां दूर हो जाती है खासतौर पर दिल की धमनियों पर जमा वसा को दूर करता है।
  • इसके अलावा इलायची हमारे पैरो की सूजन, पेट के दर्द, हाजमा, एसीडिटी, सिर दर्द और रक्तचाप को नियंत्रित करता है साथ ही खून की कमी को भी पूरा करता है।
विशेष याद रखने वाली बात

आपको इलायची खाते समय यह सावधानी रखनी होगी कि इसे केवल 1 ही खाये और खाने के बाद इसे अच्‍छी तरह चबाए और कोशिश करें कि इसे खाना खाने के बाद खाए।

डायबीटिज से बचाव के प्राकृतिक उपचार


ड़ायबीटिज एक बहुत हीं खतरनाक बीमारी है लेकिन अगर आप प्राकृतिक उपायों से इस पर नियंत्रण कर सके तो मधुमेह से आपको घबराने की जरुरत नहीं है। डायबीटिज को समझें और उसका उपचार करें। निम्न कुछ प्राकृतिक उपचार से आप ड़ायबीटिज पर नियंत्रण पा सकते हैं।


  • दालचीनी: अध्ययन से पता चलता है कि दालचीनी मधुमेह को नियंत्रित करने में बहुत हीं महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दालचीनी लगभग हर घर में पाया जाता है। यह हानिकारक कोलेस्ट्रोल को कम करता है और आपके शरीर में रक्त शर्करा कि मात्रा को भी घटाता है जिससे मधुमेह के रोगियों को बहुत हीं लाभ पहुँचता है। दालचीनी भले हीं मधुमेह का प्राकृतिक उपचार करने में सहायक सिद्ध होता है लेकिन इसका अत्यधिक सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे लाभ कि बजाये नुकसान हो सकता है। आप दालचीनी पीस लें और चुटकी भर चाए में उबालकर दिन में एक दो बार पिया करें। जो लोग मधुमेह के शिकार हो चुके हैं और उसके लिए दवाइयां ले रहे हैं वे दालचीनी का उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर कि सलाह अवश्य लें। लेकिन जिन्हें मधुमेह नहीं हुआ है या जो अब तक मधुमेह कि दवाइयां नहीं ले रहे हैं वे अगर दालचीनी का नियमित रूप से सेवन करें तो वे ड़ायबिटिज के शिकार होने से बच सकते हैं।

  • अंजीर के पत्ते: अंजीर के पत्ते कई प्रकार के रोगों के उपचार में लाभ पहुंचाते हैं जैसे ब्रोंकाइटिस, जननांग मौसा, लीवर सिरोसिस, उच्च रक्तचाप इत्यादि। लेकिन मधुमेह के इलाज के लिए अंजीर के पत्ते सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। अंजीर के पत्तों से न सिर्फ मधुमेह का उपचार किया जाता है बल्कि ये पत्ते और भी कई बीमारियों में लाभ पहुंचाते है। इसके पत्ते को उबालकर, छानकर, पानी को ठंढा करके पीया करें।

  • आम के पत्ते: यूँ तो पका हुआ आम मधुमेह के मरीजों के लिए पूरी तरह से वर्जित होता है लेकिन इसके विपरीत आम के पत्ते मधुमेह के मरीजों को काफी लाभ पहुंचाते हैं। आप आम के कुछ ताजे पत्तों को एक ग्लास पानी में उबाल लें और रात भर उसे वैसे हीं छोड़ दें। सुबह होने पर पानी को स्वच्छ कपडे से छान लें और खाली पेट में पी लिया करें। ऐसा नियमित रूप से कई दिनों तक करने से ड़ायबीटीज के मरीजों को काफी फायदा पहुंचता है। यह मधुमेह के लिए एक बहुत हीं प्रभावी प्राकृतिक एवं घेरेलू उपाय है। 

  • मेथी के बीज: ड़ायबीटिज को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने में मेथी के बीज भी बहुत हीं कारगर सिद्ध होते हैं। मेथी के बीज में कुछ ऐसे घटक छिपे होते हैं जो आपके शरीर के भीतर मौजूद रक्त शर्करा को कम करते हैं। इसमें ४ हाईड्रोओक्सीसोल्युसीन नामक अमीनो एसिड होता है। यह अमीनो एसिड आपके अग्न्याशय से इंसुलिन का स्राव उत्तेजित करते हैं जिसकी वजह से आपके रक्त में मौजूद शर्करा इंधन के रूप में बदल जाता है। इस तरह एक ओर जहाँ इस प्रक्रिया से आपको शक्ति एवं उर्जा मिलती है वही दूसरी ओर आपके शरीर में रक्त शर्करा की मात्रा कम होती है। मेथी के बीज में जेनटियानाइन, ट्रीगोनेलीन और कारपाइन नामक घटक भी पाए जाते हैं जो आपके भोजन से कार्बोहाईडरेट का अवशोषण धीमा करते हैं और आपके रक्त प्रवाह में ग्लूकोज की मात्रा घटाते हैं।

  • करेले का रस: ताजे करेले का रस भी ड़ायबीटिज को नियंत्रित करने का एक बहुत हीं प्रभावकारी प्राकृतिक उपचार है। एक छोटे से करेले का बीज निकाल लें और करेले का रस निकलकर रोजाना सुबह सुबह खाली पेट में पीया करें। यह आपके लीवर और अग्न्याशय को स्वस्थ रखता है जिससे कि इंसुलिन का उत्पादन सुचारू रूप से होता रहता है और आपके रक्त में रक्त शर्करा की मात्रा बढ़ने नहीं पाती।