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स्वस्थ रहने के 15 तरीके, बीमारियां रहेंगी कोसों दूर


  1. ब्‍लड शुगर लेवल को स्थिर करने और अगले भोजन में आपको अधिक खाने से बचाने के लिए मीड मील महत्वपूर्ण होता है। इसलिए आप भी इस समय के दौरान दही, बेरी पारफेट, अंकुरित मूंग, नारियल और नट्स आदि जरूर खाएं।
  2. घास पर नंगे पैर चलना/आउटडोर मील लेना। यह आपको अपने आस-पास से जुड़ने में मदद करता है और आप जो भोजन कर रहे हैं उसके बारे में अधिक ध्यान रखते हैं। साथ ही नंगे पैर चलने से आपको तनाव दूर करने और आंखों की रोशनी में सुधार करने के साथ-साथ सूजन कम करने में मदद मिलती है।
  3. गुड फैट वाले फल इंसुलिन स्पाइक्स को कम करने में मदद करते हैं और आपको लंबे समय तक भरा हुआ रखते हैं। इसलिए इसे अपनी डाइट में शामिल करें।
  4. हरी सब्जियों का जूस पीने से आपके फाइबर का सेवन बढ़ता है, इससे ब्लड शुगर लेवल और कोलेस्ट्रॉल लेवल नियंत्रित रहता है। हरी पत्तेदार सब्जियों में पाया जाने वाला विटामिन K हेल्‍दी ब्‍लड वेसल्‍स को बनाए रखने, हार्ट की समस्याओं के जोखिम को कम करने और उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों के नुकसान को रोकने सहित कई स्वास्थ्य लाभों से जुड़ा है।
  5. दाल, रोटी और चावल में शुद्ध घी को डाइट में शामिल करना आंत में चिकनाई का काम होता है और कब्ज से राहत मिलती है।
  6. घर का बना खाना बेहद फायदेमंद होता है क्योंकि यह आपको भोजन के साथ संबंध बनाने की अनुमति देता है और एक ही बार में आपकी सभी 5 इंद्रियों का उपयोग करता है।
  7. हाथों से भोजन करने से आपका संबंध भोजन से जुड़ता है और सकारात्मक विचारों में वृद्धि होती है।
  8. प्राकृतिक चीनी के साथ रिफाइंड चीनी को बदलने से आपकी कमर के आस-पास का फैट कंट्रोल में रहता है और अन्य सूजन संबंधी बीमारियां जैसे पीसीओ, आईबीएस दूर रहती हैं।
  9. बिना किसी अपराध बोध के प्रत्येक भोजन का आनंद लें क्योंकि कैलोरी और भोजन के वजन के बारे में चिंता करने के लिए आम जीवन बहुत छोटा है।
  10. आपकी दैनिक नमक की खपत 1 ग्राम (या 1 चम्मच) से अधिक नहीं होनी चाहिए। अपना भोजन तैयार करते समय कम नमक डालें, सोया सॉस जैसे उच्च-सोडियम मसालों की मात्रा को सीमित करें जो आप अपने खाद्य पदार्थों में शामिल करते हैं और नमकीन स्नैक्स से बचें। अपनी डाइट में सोडियम की मात्रा कम करने से हाई ब्‍लड प्रेशर का खतरा कम हो जाता है।
  11. दिन में 8 गिलास पानी पीना याद रखें। आपका शरीर 80% पानी से बना है और पानी कब्‍ज को दूर करने और इम्‍यूनिटी और त्वचा के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
  12. हफ्ते में कम से कम 150 मिनट एक्‍सरसाइज या हफ्ते में कम से कम 5 दिन 30 मिनट एक्‍सरसाइज करने का प्रयास करें। चाहे वह टहलना हो, जॉगिंग करना हो, स्विमिंग हो या घर पर पिलाटे्स वर्कआउट करना हो, लक्ष्य शारीरिक रूप से एक्टिव रहना है।
  13. नींद और इम्‍यून सिस्‍टम के बीच एक मजबूत संबंध है। जब आप सो रहे होते हैं तो 7 से 9 घंटे की नींद आपके शरीर को हेल्‍दी और मजबूत बनाती है। अच्छी नींद आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।
  14. बार-बार और लंबे समय तक धूप में रहने से त्वचा कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। लंबे समय तक धूप में रहने से बचें और जब आप बाहर हों तो सनस्क्रीन और लंबी बाजू के कपड़ों से खुद को सूरज की किरणों से बचाना सुनिश्चित करें।
  15. अपने हाथों को बार-बार साबुन और पानी से धोना या अल्कोहल बेस सैनिटाइज़र का उपयोग करना इंफेक्‍शन के प्रसार को रोकने का एक सरल लेकिन प्रभावी तरीका है। 

पेट के लिए बेल से भी ज्यादा फायदेमंद हैं पपीते के पत्ते, जानें कैसे?


पेट और डाइजेशन फिट होना बहुत जरूरी होता है, क्‍यों कि जब तक आपका पेट सही नही होगा तब तक आप सेहतमंद नही हो सकते हैं। इसलिए बहुत जरूरी है कि आप अपने पेट को स्वस्थ व सेहतमंद रखें। यदि आप इस प्रयास में आगे बढना चाहते हैं और एक घरेलू उपाय की मदद से अपने पेट व आंतों की सेहत को सुधार सकते हैं। अपने पेट को साफ रखने के लिए आप अपने किचन में मौजूद सामग्री का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए पपीता के पत्‍ते का रस काफी फायदेमंद हो सकता है। इसे बनाना बहुत आसान है। इस लेख से सीखिए जूस तैयार करना।



सामग्री
  • पपीते के पत्तों का रस- 3 बड़े चमच
  • शहद- 1 बड़ा चमच


जूस बनाने की विधि

ऊपर दी गई सामग्री को एक गिलास में ड़ालकर मिलाएं। इस मिश्रण को 15 दिन तक रोज़ सुबह खाली पेट पिएं। यह मिश्रण आपके पेट को साफ कर आपको हल्का महसूस कराएगा। इसके अलावा, पपीते के पत्तों से बना यह रस आपके आँतों में मौजूद जीवाणुओं व बैक्टीरिया का खात्मा करता है तथा आपके पेट को सेहतमंद बनाता है। पपीते के पत्तों और शहद में मौजूद विटामिन व मिनरल पेट की कोशिकाओं को पोषित करते हैं तथा स्वस्थ पाचन रस के उत्पादन में सहायता करते हैं।

लंबे समय तक जवान बने रहने के लिए अपनाएं ये देसी नुस्खे


आज के समय में अनियमित दिनचर्या के चलते अधिकांश युवा बहुत ही जल्द बुढ़ापे में होने वाले रोगों से पीड़ित हो जाते हैं। असमय बाल सफेद होना, कमजोरी बने रहना, जल्दी थक जाना, जोड़ों में दर्द होना, नजर कमजोर हो जाना आदि ये सभी बुढ़ापे में होने वाली परेशानियां हैं। इन परेशानियों से बचने के लिए आयुर्वेद में कई देसी नुस्खे बताए गए हैं। इन नुस्खों को नियमित रूप से अपनाते रहने पर लंबे समय तक बुढ़ापे के रोगों से बचे रह सकते हैं।

जानिए कुछ खास नुस्खे जो लंबे समय तक युवावस्था बनाए रखते हैं...
रोज सुबह अपनाएं ये नुस्खा...
हर रोज आंवले का रस, गाय का घी, शहद मिश्री, इन चारों को 15-15 ग्राम की मात्रा में मिला लें। सुबह-सुबह खाली पेट इस मिश्रण का सेवन करें। इसके बाद 2 घंटे तक कुछ नहीं खाए। नियमित रूप से इसे लेते रहने से कई प्रकार के रोग दूर होते हैं। ये मिश्रण बुढ़ापा दूर रखने के लिए काफी कारगर उपाय है।
- प्रतिदिन अनार का सेवन करने से भी बुढ़ापे के रोग दूर रहते हैं। जवानी बनी रहती है। अनार के सेवन से रक्त संबंधी कई विकार दूर होते हैं। यह रक्त की कमी दूर करने में भी मदद करता है।
ध्यान रखें, यहां दिए नुस्खों को प्रारंभ करने से पूर्व किसी चिकित्सक से भी परामर्श अवश्य कर लेना चाहिए।



संतुलित आहार लें...


प्रतिदिन संतुलित आहार ग्रहण करना चाहिए। ऐसा भोजन करें जो आसानी से पच सके और शरीर के पाचन तंत्र पर बुरा प्रभाव डालता हो। भोजन में विटामिन, प्रोटीन, खनिज तत्वों की भरपूर मात्रा होनी चाहिए। गरिष्ठ भोजन, तेल, घी, शर्करायुक्त चीजें खाने से बचें।
तनाव से दूर रहें...



तनाव से दूर रहें। जो लोग अधिक सोचते हैं और मानसिक तनाव महसूस करते हैं, उन्हें बुढ़ापे के कई रोग युवावस्था में ही सताने लगते हैं। यदि मानसिक तनाव अधिक रहता हो तो अच्छे दोस्तों के साथ समय व्यतीत करें। मधुर संगीत सुनें। अच्छी किताबें पढ़ें। इससे मानसिक तनाव दूर होता है। तनाव दूर होगा तो कई प्रकार के रोग नहीं होंगे।



लहसुन का नुस्खा


शारीरिक कमजोरी दूर करने के लिए रोज रात को सोने से पहले लहसुन की दो कलियां निगल लें। फिर थोड़ा-सा पानी पिएं। ऐसा नियमित रूप से करें। इस नुस्खे के नियमित प्रयोग से कमजोरी की शिकायत में राहत मिलती है।
आंवले के नुस्खे



- शक्ति बढ़ाने के लिए आंवले के चूर्ण में मिश्री पीसकर मिलाएं। इस मिश्रण को प्रतिदिन एक चम्मच मात्रा में रात को सोने से पहले ग्रहण करें। इसके बाद थोड़ा-सा पानी पिएं।
- आंवले का मुरब्बा नियमित रूप से लेते रहेंगे तो सभी प्रकार की कमजोरी दूर हो जाएगी।



सफेद मुसली का नुस्खा

कमजोरी के दूर करने के लिए यह उपाय नियमित रूप से करें। सफेद मूसली या धोली मूसली का चूर्ण बनाएं। यह चूर्ण एक चम्मच और एक चम्मच पिसी मिश्री, मिला लें।सुबह उठने के बाद और रात को सोने से पहले गुनगुने दूध के साथ पिएं। ऐसा करने पर शारीरिक शक्ति प्राप्त होती है और सभी दैनिक कार्य करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा बनी रहती है।
दूध की मलाई और मिश्री का नुस्खा
दूध की मलाई और बारीक पिसी हुई मिश्री को एक साथ मिलाएं और इसका सेवन नियमित रूप से करें। ऐसा करने से कमजोरी दूर होती है और लंबे समय तक शरीर बलवान बना रहता है। चेहरे पर रौनक बनी रहती है।



ध्यान रखें ये बातें भी...

- प्रतिदिन नींद का विशेष ध्यान रखना चाहिए। नींद की कमी कई रोगों को जन्म देती है। अत: प्रतिदिन कम से कम 6 से 8 घंटे की नींद अवश्य लेनी चाहिए।

- सुबह जल्दी उठना चाहिए और रात को सही समय पर सो जाना चाहिए।

- दिन के समय में या शाम के समय में सोने से बचना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति बीमारी की अवस्था में है या वृद्ध है तो वह दिन के समय में सो सकता है। युवा और स्वस्थ लोगों को दिन में नहीं चाहिए। असमय सोने से भी कई प्रकार की बीमारियां पनप सकती हैं।

- प्रतिदिन सुबह व्यायाम करें। योग से बुढ़ापा दूर रहता है। शरीर स्वस्थ और ऊर्जावान बना रहता है। सुबह-सुबह टहलना भी स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है।


युवावस्था बनाए रखने के लिए हर रोज कुछ समय गर्भासन करना चाहिए। आगे जानिए गर्भासन करने की विधि और सावधानियां...

गर्भासन की विधि

किसी साफ एवं स्वच्छ स्थान पर कंबल बिछाकर पद्मासन की अवस्था में बैठ जाएं। इसके बाद अपने हाथों को जांघ पिंडलियों के बीच से फंसा कर कोहनियों तक बाहर निकाल लें। अब दोनों कोहनियों को मोड़ते हुए दोनों घुटनों को ऊपर की ओर उठाएं।


इसके बाद शरीर को संतुलित करते हुए दोनों हाथों से अपने कान को पकड़ें। आसन के इस स्थिति में आने पर शरीर का पूरा भार नितंब (हिप्स) पर रहता है। इस स्थिति में 1 से 5 मिनट तक रहें और पुन: धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में जाएं।
इस आसन को करने में कुछ कठिनाइयां हो सकती हैं, लेकिन धीरे-धीरे अभ्यास के साथ ही यह आसान हो जाता है। इस संबंध में किसी प्रशिक्षित योग शिक्षक या चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।


गर्भासन के लाभ


इस आसन से रीढ़ की हड्डी मजबूत और लचीली होती है। यह आसन शरीर की नसों और मांसपेशियों के दोषों को दूर करता है। शरीर को हल्का करता है तथा रक्त संचार को सही करता है। भूख को बढ़ाता है तथा स्नायु की दुर्बलता को दूर करता है।



गर्भासन स्त्रियों के लिए भी लाभकारी है। इससे गर्भाशय के कई रोग ठीक हो सकते हैं। कम उम्र की लड़कियां अगर इस आसन को नियमित रूप से करेंगी तो उन्हें गर्भाशय से संबंधित बीमारियां नहीं होती हैं। इससे मुख की सुंदरता बढ़ती है। इस आसन के नियमित अभ्यास से स्त्री-पुरुष दोनों अधिक समय जवान रह सकते हैं।